Monday, September 28, 2015

मोदी के अमेरिका शो का असली मकसद

अमेरिका के कैलिफोर्निया के सैन होजे में रविवार का दिन हर रविवार से अलग था। शहर में रोज से कहीं ज्यादा भारतीय दिख रहे थे। किसी के हाथ में भारत का झंडा था, तो किसी के हाथ में मोदी की तस्वीर। सभी सैप सेंटर में मोदी का भाषण सुनने जा रहे थे। हजारों की भीड़ में नरेंद्र मोदी आए तो भीड़ ने मोदी-मोदी के नारे के साथ उनका स्वागत किया। एक साल मेें दूसरी बार अमेरिका की यात्रा और दूसरी बार रंगारंग जलसा। पहला न्यू यॉर्क के मैडिसन स्क्वायर में पिछले साल सिंतबर में हुआ था। मोदी ने भाषण में उन्हीं बातों का जिक्र किया जो अमूूमन वो भारत में भी करते आए हैं। इस बड़े आयोजन की दूसरी बार जरूरत क्यों पड़ी इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए आपको कई साल पीछे जाना होगा। 

2002 के गुजरात दंगों के बाद जब सत्ता में यूपीए आई थी, उसने अमेरिका को नरेंद्र मोदी को अमेरिका का वीजा नहीं देने के लिए राजी कर लिया था। अपमान का ये घूंट मोदी को कई बार पीना पड़ा था, और अमेरिका को लेकर मोदी के मन मे एक बदले की भावना भी थी। बदला मतलब खून खराब से नहीं बल्कि अमेरिका और अमेरिकियों को बिना मारे या हमला किए करारा जवाब देने की थी ।  और इसके लिए अमेरिका में जाकर भारी संख्या में लोगों की लोकप्रियता के केंद्र बिंदु में आने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता था । इसीलिए अमेरिका में मोदी के लिए ऐसे भव्य कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार की गई, जिसमें मोदी की छवि अमेरिका के अंदर इतनी  बड़ी हो जाए, जितनी की शायद राष्ट्रपति ओबामा की न हो। मैडिसन स्क्वायर गार्डन का कार्यक्रम इसका सबसे सफल प्रयास रहा और इसीलिए इसे दोहराने का फैसला मोदी और उनकी टीम ने किया। मोदी ने अपने दोनों सफल शो के जरिए अमेरिका को बता दिया कि उन्होंने अमेरिका का वीजा नहीं देकर कितनी बड़ी गलती की थी और अब बराक ओबामा से गहरी दोस्ती कर मोदी ने दुनिया को भी जवाब दिया है कि वो विश्व नेताओं में शामिल हो गए हैं ।

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