Saturday, June 1, 2013

बीसीसीआई ने किया बेड़ा गर्क?

क्रिकेट खेलने वाले देशों में सबसे ताकतवार क्रिकेट बोर्ड के तौर पर अपना रुतबा दिखाने वाला बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया यानी बीसीसीआई ने भारतीय क्रिकेट को कभी जिन बुलंदियों पर पहुंचाने में भूमिका अदा की थी। अब उसी बोर्ड के कुछ सदस्यों की वजह से पिछले एक दशक में भारतीय क्रिकेट
की छवि धूमिल हुई। पिछले एक दशक के दौरान दुनिया में जहां भी क्रिकेट में फिक्सिंग के मामले उजागर हुए उनमें एक-दुक्का को छोड़कर सबमें किसी न किसी भारतीय(क्रिकेटर या बुकी) का नाम सामने आया(जहां तक मेरी जानकारी है)...इसके बाद क्रिकेट की दुनिया को ग्लैमर का चोंगा पहनाने वाला आईपीएल शुरु हुआ..इसे शोहरत दिलाने वाले शख्स ललित मोदी के दामन पर भी दाग लगे...आलम तो ये है कि ललित मोदी आज भगोड़े हैं...और भारत आने से कतराते हैं....और इसके बाद पिछले दो आईपीएल सीजन(5,6) में फिक्सिंग का जो खेल खेला गया, उसने न सिर्फ आईपीएल को सवालों में खड़ा किया, बल्कि भारतीय क्रिकेट की छवि को भी काफी नुकसान पहुंचाया। कहते हैं कि दुनिया की परवाह नहीं करनी चाहिए, लेकिन जब उसी दुनिया ने भारत के क्रिकेटरों को सिर आंखों पर बिठाया है...तो भला दुनिया की परवाह क्यों न की जाए । भारत में क्रिकेट को निष्पक्ष और बेदाग बनाए रखने की सबसे जिम्मेदारी इसके कर्ता-धर्ता बीसीसीआई की है...लेकिन बेचारी बीसीसीआई...लाचार बीसीसीआई...नेताओं वाली बीसीसीआई..कुछ नहीं कर पा रही है...ऐसे में ये सवाल उठना लाज़मी है कि क्या बीसीसीआई ने ही
बेड़ा गर्क तो नहीं किया? अगर ऐसा हुआ है..तो इसका इलाज जरुरी है...चाहे वो ऑपरेशन कितना ही मुश्किल क्यों न हो?....इसलिए बीसीसीआई की सर्जरी ज़रुरी है....