Wednesday, December 10, 2008

भागो भईया...हवा खराब है...


भागो भईया...हवा खराब है...

हवा-हवाई कंपनियों के लिए मंदी के बाद से यही स्थिति है। भागो भईया...हवा खराब है..वाली स्थिति। अमेरिका की एक से एक बढ़कर एक धुरंधर कंपनियां, जिन्होंने बेहद ही जोर-शोर और धमाकेदार तरीके से अपना एक्सपेंशन किया, हजारों-लाखों को रोजगार दिया, दनादन एक देश से दूसरे देश, दूसरे से तीसरे और तीसरे से न जाने कहां-कहां अपने ऑफिस खोले। अमेरिकी कैपटलिज्म के देश-दुनिया में फैलाया। आज वहीं आर्थिक हवा खराब होने पर कह रही हैं..भागो भईया..हवा खराब है...। या ये भाग नहीं रही हैं, तो अपने कर्मचारियों को भगा रही है। जनता बड़ी ही भोली होती है.. चाहे भारतीय हो या फिर अमेरिकी...सब चक्कर में पड़कर घनचक्कर बन जाती हैं। और बने भी क्यों ने पापी पेट और लाइफस्टाइल का जो सवाल हैं। अमेरिका में अक्टूबर में जहां 2 लाख 40 हज़ार की नौकरी गई तो नवंबर में 13 साल का रिकॉर्ड टूट गया और कुल 5 लाख 33 हज़ार लोग मंदी इफेक्ट बेरोजगार बन गए। वहां नौकरियों में छंटनी का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है, सिटी बैंक. फोर्ट मोटर, गोल्डमैन साक्स और न जाने-जाने कौन-कौन सी कंपनी थोक भाव में कर्मचारियों को नमस्ते कहते जा रही हैं। बुश साहब.. आपकी नौकरी नहीं जा रही है.. इसकी खुशी मनाइए..। ऑटो सेक्टर भी मंदी की मार झेल रहा है.. कर्मचारियों को नमस्ते कहने का मन तो बनाए है, लेकिन सरकारी पेंशन का इंतजार कर रहा है। अमेरिकी सरकार उनके लिए भी बेल आउट का इंतजाम करने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी सब प्राइम संकट ने पूरी दुनिया की हवा खराब कर दी.. कंपनियों की हवा खरीब कर दी है। भारत में भी हवा की खराबी का असर पड़ा है। निर्यात रुकने से 65 हजार(सरकारी आंकड़ा असल में पता नहीं कितने) कामगारों की नौकरी चली गई। बेचारे नए एमबीए वाले, नए एमसीए और एन सॉफ्टवेयर इंजीनियर इनके लिए आगे क्या है.. क्या नहीं है..ये खुद नहीं जानते। आईआईटी, आईआईएम वाले ज्यादा दुःखी नहीं है.. क्योंकि उनका हिसाब-किताब कहीं न कहीं तो बैठना ही है...। लेकिन थोड़ी बहुत मार तो इन पर भी पड़ी है। इस बार आईआईटी दिल्ली में जितनी कंपनियां प्लेसमेंट करने आई उनमें फाइनेंस, मार्केटिंग, इंश्योरेंस, ऑटो और रीयल एस्टेट जैसी कंपनियां तो पहुंची नहीं। लेकिन अमेरिकी मंदी से इन कंपनियों की हवा न खराब हो इसके लिए सरकार ने बूस्टर पैकेज वाले नॉब को दबा दिया है। अब भारत में आगे आने वाले दिनों में कैसा माहौल रहता है ये देखना होगा।

Monday, December 8, 2008

फैलता आतंक…. सब ठीक है?


फैलता आतंक…. सब ठीक है?
मुंबई में हुए आतंकी हमलों को अभी बमुश्किल पंद्रह दिन भी नहीं बीते हैं…. कि ये मुद्दा आम जनता के बीच से गायब होता नज़र आ रहा है। 180 से ज्यादा बेकसूर और बेगुनाहों की जानें चली गई...कितने बच्चे अनाथ हो गए...कितनी महिलाए विधवा हो गईं...कितनों के घर की रोजी-रोटी ख़त्म हो गई। किसी के घर अब कमाने वाला नहीं है.. तो किसी के घर पर मातम मनाने वाला नहीं है। जिनका अपना गया है... शायद उनके आंसू तो इतनी जल्दी तो नहीं सूखेंगे..उनके घाव तो इतनी जल्दी नहीं भरेंगे। लेकिन देश की बाकी जनता इस घटना को भूल गई है.. या यूं कहें उनके जेहन से भूला दी गई है। केंद्र सरकार ने मुंबई हमलों में केंद्र और राज्य सरकार की हो रही छिछालेदर को देखते हुए बड़ा ही चालाकीपूर्ण कदम उठाया है। तीन दिनों के दौरान तीन-तीन अलग-अलग घोषणाएं..। शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी... शानिवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ब्याज दरों में कमी कर सस्ते लोन का सपना दिखा दिया और रविवार को सरकार ने उद्योग-जगत के लिए राहत पैकेज का एलान कर अपनी आर्थिक सुधारों वाली छवि पेश करने की कोशिश की। रही-सही कसर सोमवार को विधानसभा चुनावों की मतगणना ने कर दी। कांग्रेस को तीन राज्यों में जीत.. तो बीजेपी को दो राज्यों में जीत..। कांग्रेस वाले बेहद खुश की महंगाई.. आतंकवाद...बदतर आर्थिक हालात जैसे मुद्दे से जूझ रही सरकार की स्थिति अंधे के हाथ में बटेर मिलने जैसा है। उधर, सोमवार को महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री ने सोमवार को अपने लम्बे चौड़े मंत्रिमंडल के साथ शपथ ले ली। केंद्र में भी सरकार अब आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी जानी-पहचानी सुस्त चाल में नज़र आने लगा है। एक पखवाड़े के दौरान केंद्र ने अब तक देश में आतंकवाद को रोकने के लिए कोई ठोस कदमों की घोषणा नहीं की है। अब सभी दल संसद के फाइनल की तैयारी शुरू कर देंगे। कुछ विपक्षी उन्हीं मुद्दों को उठाएंगे जिससे कांग्रेस डरेगी.. कांग्रेस ऐसे मुद्दे उठाएगी जिससे वो देशभर के वोटरों को रिझा सके। लेकिन इन सबके बीच समूचा देश एक बार फिर आतंकवाद को लेकर एक मूक दर्शक बन जाएगा। जनता फिर सो जाएगी....वो तभी जागेगी जब कहीं और आतंकवादी हमला होगा...। लाखों लोगो सड़कों पर फिर निकलेंगे.. फिर सरकार विरोधी, नेता विरोधी और आतंकवाद विरोधी नारे लगाए जाएंगे। लेकिन...इसके लिए फिर कुछ मासूमों को आतंकवाद...राजनीतिज्ञों की दृढ़ अनिच्छा शक्ति की भेंट चढ़ना होगा....।
क्या आप फिर ऐसा होने देंगे??????????????????????????????