
ज़रा सोचिए अगर किसी की मंशा बिना उसकी मेहनत के पूरी हो जाए तो उसे कैसा महसूस होता होगा। दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के खिलाफ साजिश रचने और उसे बर्बाद करने वाले आतंकवादियों की मंशा भी घर बैठे-बैठे ही पूरी हो रही है....कैसे। दरअसल उन आतंकियों के बदले कोई और वहां खून की होली खेल रहे हैं। और वो हैं वहां के कुछ निराशा और कुंठा के शिकार लोग और छात्र....। 03 अप्रैल को न्यूयॉर्क के विंघमटन स्थित अमेरिकी सीविक एसोसिएशन सेंटर पर एक ऐसी ही घटना घटी, जिससे अमेरिका विरोधी आतंकी संगठनों को भारी राहत मिली है। दरअसल एक हमलावर ने इस सेंटर में घुस कर 13 लोगों को गोलियों से भून डाला और 41 लोगों को बंधक बना डाला था। हालांकि जैसा हमेशा से होता आया है ,उसने भी खुद को गोली मार ली। अमेरिका में जब से 9/11 की खौफनाक घटना घटी है उसके बाद वहां की सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक चौबंद कर दी गई है कोई बाहरी परिंदा पर भी नहीं मार सकता है ( हा हा हा हा....)। लेकिन वहां के निवासियों को पर फैलाने की पूरी आजादी... है या फिर दी गई है। इस हिंसक आजादी का अंदाजा पिछली कुछ घटनाओं से लगाया जा सकता है।
- 2 अक्टूबर 2006- अमरीका में पेंसिलवेनिया प्रांत के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में 4 बच्चे मारे गए और 8 घायल .
- 16 अप्रैल 2007- अमरीकी विश्वविद्यालय में अंधाधुंध गोलीबारी, 32 मरे
- 7 अक्टूबर 2007- .विस्कोन्सिन प्रांत में बंदूकधारी ने 6 लोगों की हत्या की
- 14 फरवरी 2008- फिनलैंड में एक कॉलेज में एक छात्र ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाकर कम से कम 10 लोगों को मार डाला.
- 23 सितंबर 2008- फिनलैंड में एक कॉलेज में एक छात्र ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाकर कम से कम 10 लोगों को मार डाला
- 11 मार्च 2009- अमेरीकी राज्य अलाबामा में एक बंदूकधारी की गोलियों से कम से कम नौ व्यक्तियों की मौत
- 03 अप्रैल 2009- .विंघमटन में बंदूकधारी ने 13 लोगों की हत्या की।
ये कुछ घटनाएं हैं, जिनमें किसी बाहरी शख्स या आतंकियों का हाथ नहीं था, बल्कि उसके अपने नागरिकों ने ही उसकी धरती को खून से लाल कर दिया है। इन घटनाओं के पीछे कारणों पर नज़र डाले तो कई कारण निकलते हैं। इनमें सबसे पहला कारण है अमेरिका में हथियार खरीदने की सरल नीति। अमेरिका में हथियार खरीदना बड़ा ही आसान है। साथ ही गन संस्कृति भी बहुत मशहूर है, वहां के फिल्मों, मैग्जीन, किताबों, टेलीविजन और गानों की एलबम में हथियार और उससे जुड़े विज्ञापन आसानी से देखे जा सकते हैं। अपनी सुरक्षा का हवाला देकर कोई भी अमेरिकी अग्नेयास्त्र तक खरीद सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के 25 फीसदी युवाओं के पास बंदूक और पिस्तौल जैसे हथियार हैं। अमेरिका में हथियार को लेकर राजनीति भी बहुत हुई है, जिसे गन पॉलिटिक्स का नाम दिया गया है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायलय ने तो वहां एक केस के बाद आदेश दिया है कि हर एक व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रख सकता है। अब ऐसी परिस्थिति में अगर वहां का कोई भी व्यक्ति डिप्रेशन या कुंठा का शिकार होता है,तो वे हथियार चलाने से गुरेज नहीं करता है। इधर जब से मंदी हावी हुई है तब से युवाओं में डिप्रेशन और भी बढ़ गया है। शुक्रवार को हुए हादसे की शुरुआती जांच के बाद भी यही सामने आया है कि जिस व्यक्ति ने गोली चलाई उसे कुछ महीने पहले एक कंपनी ने मंदी का हवाला देकर निकाल दिया। अमेरिका में एक और बड़ा कारण है बच्चों का मां- बाप से कम उम्र में ही अलगाव, ये अलगाव अमेरिकी युवाओं को समय से पहले ज्यादा परिपक्व बना दे रहे हैं।
अब ओबामा सरकार को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और इराक पर ध्यान कम करके अपने देश के युवाओं को एक नई सोच और दिशा देने की जरुरत है। साथ ही हथियार खरीद नीति में भी बदलाव करने की जरुरत है। नहीं तो अमेरिका को उसके अपने ही खून की होली से लाल करते रहेंगे।

